‘ढहा दो आसाराम आश्रम के सभी अवैध निर्माण’


यौन शोषण के आरोपों में जेल में बंद 72 वर्षीय आसाराम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उनके करोल बाग के सेंट्रल रिज एरिया के आश्रम में मौजूद सभी अवैध निर्माणों को ढहाने का आदेश दिया है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को इस कार्रवाई का आदेश देते हुए आश्रम को डेमोलिशन में आने वाला पूरा खर्च देने और उस इलाके में एक हजार पेड़ लगाने का भी निर्देश दिया।

कमिटी ने कही थी अवैध निर्माण की बात

एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए आसाराम ट्रस्ट के आश्रम में मौजूद सभी अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। इसके पहले एनजीटी द्वारा बनाई गई कमिटी ने आश्रम में अवैध स्ट्रक्चर और एनक्रोचमेंट होने की पुष्टि की थी। रिपोर्ट में कमिटी ने कहा था कि इकोलॉजिकल सेंसिटिव सेंट्रल रिज एरिया में मौजूद इस आश्रम में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुआ है। इसमें दिल्ली सरकार के अडिशनल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और रिज मैनेजमेंट बोर्ड के रिप्रेजेंटेटिव को शामिल किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान कमिटी को आश्रम में ऐसे तमाम अस्थायी और स्थायी स्ट्रक्चर मिले थे, जो आश्रम के 996 के मैप में मौजद नहीं थे। आश्रम के अधीन कुल करीब 4312 वर्ग मीटर इलाका बताया गया था, जिसमें 350 फीट लंबा आश्रम तक पहुंचने का रास्ता भी शामिल था। एनजीटी की ओर से कमिटी को यह भी बताने के लिए कहा गया था कि क्या आश्रम में हाल ही में कोई और निर्माण भी किया गया है।

नवंबर-2013 में दाखिल की गई थी याचिका

एनजीटी ने यह फैसला संजय कुमार की याचिका पर सुनाया। नवंबर-2013 में एडवोकेट गौरव बंसल के जरिए दाखिल इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि आसाराम के ट्रस्ट ने सेंट्रल रिज एरिया में अवैध रूप से आश्रम और अन्य निर्माण करा रखे हैं, जबकि दिल्ली सरकार के मई-1994 में जारी नोटिफिकेशन में यह इलाका इंडियन फॉरेस्ट एक्ट के तहत ‘रिजर्व्ड फॉरेस्ट’ घोषित है। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से याचिकाकर्ता ने इस आश्रम के अवैध होने का पता चलने की बात कही थी। एनजीटी में दाखिल अपने 74 पन्नों के जवाब में आसाराम ट्रस्ट ने आश्रम और आश्रम में चल रही सभी गतिविधयों के वैध होने का दावा किया था।

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