चिकित्सा शिविर में आठ महिलाओं की मौत


छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक सरकारी चिकित्सा शिविर में आठ महिलाओं की मौत के बाद से तनाव बना हुआ है.

इस चिकित्सा शिविर में शामिल कई महिलाओं की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है.

चिकित्सकों ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया है.

बिलासपुर के पेंडारी गांव में केंद्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत शनिवार को नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था.

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी लक्ष्य पूरा करने की हड़बड़ी में केवल छह घंटे के भीतर ज़िला अस्पताल के एक चिकित्सक ने अपने एक सहयोगी के साथ मिल कर 83 महिलाओं की नसबंदी कर दी.

मृतकों में से एक जानकीबाई के पति का कहना था कि नसबंदी से पहले दवाई खाते ही महिलाओं को उल्टी शुरु हो गई लेकिन डाक्टर ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया और महिलाओं की हालत बिगड़ती चली गई.

बिलासपुर के ज़िला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आरके भांगे का कहना है कि महिलाओं की मौत कैसे हुई, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा.

डॉक्टर भांगे के अनुसार, “इस हादसे में अभी तक चार महिलाओं की मौत हुई है, जबकि 35 महिलाओं को ज़िला चिकित्सालय, छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान और एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इनमें से कुछ की हालत चिंताजनक बनी हुई है.”

गुस्सा

इस घटना से आक्रोशित स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दल कांग्रेस के लोगों ने सोमवार रात राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के बिलासपुर स्थित निवास का घेराव किया जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई. कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे पर बिलासपुर बंद की घोषणा की है.

इधर राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने बीबीसी को बताया, “हमने इस पूरे मामले की जांच के लिये कमेटी बनाई है. इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे. फिलहाल हमारा पूरा ध्यान बीमार महिलाओं को सुचारु इलाज उपलब्ध कराने में है.”

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